Highlights
- BRICS Summit का पहला दिन
- ब्रिक्स देशों का साझा घोषणापत्र जारी
- शी जिनपिंग और पीएम मोदी की बैठक
दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी इस बार भारत की राजधानी नई दिल्ली में हुई। ब्रिक्स समिट के पहले दिन समिट में शामिल देशों ने AI, क्रॉस बॉर्डर पेमेंट, एकतरफा प्रतिबंधों, UNSC सुधार समेत कई खास मुद्दों पर चर्चा की। पहले दिन की सबसे खास बात ये रही कि ब्रिक्स देशों ने अपना साझा घोषणापत्र जारी किया और इससे भी खास बात ये रही कि सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आए। ब्रिक्स में भाग लेने के लिए पीएम मोदी ने शी जिनपिंग सहित सभी नेताओं का आभार व्यक्त किया।
जानें ब्रिक्स के पहले दिन की 10 खास बातें
- गलवान झड़प के बाद ब्रिक्स समिट में शामिल होने चीन के राष्ट्रपति पहली बार भारत आए। ब्रिक्स से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक भी हुई। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कई बड़ी बातें कहीं।
- चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, बैठक के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की खूबियों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं, दोनों देशों को साथ मिलकर काम करना चाहिए।
- BRICS के साझा घोषणापत्र में सदस्य देशों ने जंग और टकराव रोकने, बातचीत और कूटनीति के जरिए अंतर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान करने और वैश्विक मुद्दों पर सभी देशों के नजरिए का सम्मान करने पर जोर दिया।
- साझा घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर भी चिंता जताई गई, इन्हें WTO नियमों के खिलाफ बताया गया और इस घोषणा में BRICS के सदस्य देशों ने आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकियों को सुरक्षित पनाह मिलने जैसी चुनौतियों से निपटने के संकल्प को भी लिए।
- घोषणा में सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की भी निंदा की।
- घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने, आतंकियों की जवाबदेही तय करने और सं आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की अपील को दोहराया गया।
- पीएम मोदी ने BRICS समिट में कहा कि एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, बायो टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज भविष्य के अवसरों के साथ वैश्विक नियम भी तय कर रहे हैं। ऐसे में ग्लोबल साउथ की समान भागीदारी जरूरी है।
- BRICS घोषणापत्र में एकतरफ़ा आर्थिक और सेकेंडरी प्रतिबंधों की निंदा की गई और इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इनसे विकास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मानवाधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है।
- BRICS के सदस्य देशों ने एकतरफ़ा टैरिफ़, नॉन-टैरिफ़ बाधाओं और अन्य संरक्षणवादी उपायों पर भी चिंता जताई।
- BRICS समिट के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में जारी जंग को लेकर कहा कि मिडिल ईस्ट की जंग से इस क्षेत्र के लोगों को गंभीर नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि यह जंग अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के मुताबिक नहीं है।
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